उड़ता हरियाणा’ को सेहतमंद बनाने को लेकर पुलिस की नई पहल
उड़ता हरियाणा को फिर से तंदुरुस्त बनाने के लिए पुलिस अब युवाओं को खेलों के साथ जोड़ रही है तो इसके साथ ही अब नशा तस्करों की आर्थिक कमर भी तोड़ी जा रही है। पिछले वर्ष पुलिस ने 3757 केस दर्ज करते हुए 5350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की ओर से 81 तस्करों के मकान गिराए गए तो 82 तस्करों की 46 करोड़ रुपए की संपत्ति भी जब्त की गई।
पिछले वर्ष 323 किलोग्राम अफीम, 581 किलोग्राम चरस, 34 किलोग्राम हेराइन, 459 किलोग्राम गांजा, 235 किलोग्राम मोरफिन बरामद, 33602 किलोग्राम चूरापोस्त बरामद किया गया। इससे पहले साल 2022 में 1598 मामले दर्ज करते हुए 1995 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 2022 में 271 किलोग्राम अफीम, 196 किलोग्राम चरस, 35 किलोग्राम हेरोइन, 1311 किलोग्राम गांजा, 190 किलोग्राम मोरफिन तथ 10,173 किलोग्राम चूरापोस्त बरामद किया गया। हरियाणा पुलिस की ओर से हिसार, भिवानी, दादरी, सिरसा, डबवाली, नारनौल, रेवाड़ी, नूंह, पलवल, झज्जर, सोनीपत, पानीपत, करनाल तथा कुरुक्षेत्र में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया जा रहा है।
विशेष बात यह है कि गांवों में पुलिस जवानों की ड्यूटियां लगाई गई हैं। नशेडिय़ों का अड्डा बन गए स्टेडियमों का सुधार किया गया है। गांवों में पुलिस जवान सुबह व शाम के समय जाते हैं और युवाओं को स्टेडियम में आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान ऐसे खिलाडिय़ों की टीम तैयार की जा रही है जो जिला स्तरीय तथा प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर का मानना है कि युवा देश का भविष्य है, ऐसे में जरूरी है कि उनकी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल हो। नशे से सबसे अधिक प्रभावित सिरसा जिले में भी खुद पुलिस कप्तान विक्रांत भूषण अलख जगा रहे हैं। वे तो स्वयं युवाओं के साथ खेलों में हाथ आजमाते हैं।
2020 में 2982 तो 2021 में 2745 मामले दर्ज
अगर हम आंकड़ों की बात करें तो साल 2020 में हरियाणा पुलिस ने मादक पदार्थ अधिनियम 2982 मामले दर्ज किए और 4477 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इस दौरान आरोपियों के कब्जे से 221.672 किलोग्राम अफीम, 230.764 किलोग्राम चरस, 12725.672 किलोग्राम चूरा पोस्त, 8641.6 किलोग्राम गांजा, 35.9935 किलोग्राम हेरोइन, 1.10 ग्राम कोकीन, 1297485 गोलियां और 206970 कैप्सूल बरामद किए। इसी तरह से वर्ष 2021 के दौरान हरियाणा पुलिस ने एन.डी.पी.एस. अधिनियम के तहत 2745 मामले दर्ज किए, 3975 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और 345.496 किलोग्राम अफीम, 157.259 किलोग्राम चरस, 8550.077 चूरा पोस्त, 11368.07 किलोग्राम गांजा, 29.13586 किलोग्राम हेरोइन, 1304530 गोलियां और 45280 कैप्सूल बरामद किए।
6315 विलेज मिशन टीमों का गठन
नशे पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से जहां 6000 से अधिक सरपंचों के साथ समन्वय बनाकर उन्हें पहरेदार की भूमिका दी जाएगी, वहीं पुलिस की ओर से गांव-गांव में अलख जगाने के अलावा शैक्षणिक संस्थानों में भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस कड़ी में अब तक 1200 कार्यक्रम स्कूलों और कालेजों में किए जा चुके हैं। इसके साथ ही नशा रोकने के लिए वार्ड से लेकर गांव और शहर तक पुलिस की ओर से एक खास रणनीति के अंतर्गत टीमों का गठन किया गया है। इस रणनीति के तहत 22 जिला मिशन टीमें बनाई गई हैं। सब डिवीजन 1563 वार्ड मिशन 6315 विलेज मिशन टीमें बनाई गई हैं। इस मिशन के अंतर्गत प्रतिदिन 70 से 80 हजार लोग काम कर रहे हैं। ये सारी टीमें मिलाकर स्टेट एक्शन प्लान में 55000 सूचनाएं सांझी कर रही हंै।
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नशे के खिलाफ अलख जगाते हुए पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण।
नाइजेरियन तस्कर बने सिरदर्द
अब अगर हम हेराइन यानी चिट्टा के तस्करी के नेटवर्क को देखें तो यह एक ऐसा नेक्सस बन गया है, जिसे तोडऩा अब एक चुनौती है। दरअसल अफीम और हेरोइन का सबसे बड़ा उत्पादक अफगानिस्तान है। इसके साथ ही नाइजेरियन तस्कर पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। अफगानिस्तान में करीब 3 लाख 28 हजार हैक्टेयर में अफीम यानी खसखस की खेती होती है। खसखस से अफीम बनती है और फिर अफीम को रिफाइन करने के बाद स्मैक व चिट्टा आदि बनता है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 में अफगानिस्तान में 9 हजार टन अफीम का उत्पादन हुआ।
अफगानिस्तान से ड्रग्स पाकिस्तान में आता है। पाकिस्तान से यह भारत-पाक सीमा पर भारत में तस्करी के जरिए पहुंचता है। पाकिस्तान में एक किलोग्राम हेरोइन की कीमत 2 से 6 लाख रुपए है। सीमा पर यह 20 से 25 लाख हो जाती है। इस कारोबार का आर्थिक जम्प देखिए कि नशे के बड़े मगरमच्छों से होते हुए छोटी मछलियों और फिर नशेडिय़ों तक पहुंचने का इसका दाम 1 करोड़, 2 करोड़ और 5 करोड़ रुपए किलोग्राम तक हो जाता है। चंडीगढ़ और लुधियाना व सिरसा जैसे शहरों में एक ग्राम चिट्टे की कीमत 5 से 8 हजार के बीच है। एक नशेड़ी एक बार 2 हजार रुपए की डोज लेता है। यहीं से चिट्टे का क्राइम कनैक्शन शुरू हो जाता है। चोरी, डकैती, लूट, चेन स्नैङ्क्षचग, अपने ही भाइ-बहन, मां से मारपीट यह अब पंजाब और हरियाणा में सामान्य घटनाएं हैं।
बजट ऊंट के मुंह में जीरे के सामान
इन सबके बीच ङ्क्षचताजनक तथ्य ये है कि हरियाणा में चिट्ट और नशे को रोकने के लिए सरकारी इंतजाम पर्याप्त नहीं। नशा रोकने के लिए हरियाणा में 9 सरकारी नशा मुक्ति केंद्र है। कोई पुनर्वास केंद्र नहीं है। मल्टीस्पैशलिटी अस्पताल नहीं है। पूरे हरियाणा में करीब साढ़े 4 लाख से अधिक युवा नशे के आदी हैं। नशा रोकने के लिए बजट ऊंट के मुंह में जीरे के जैसा है। साल 2018-19 में बजट 157 लाख था। 2019-20 में 166 लाख जबकि 2020-21 में यह 247 लाख था।
नशे के इस बढ़ते जाल के बाद हम अगर तस्करी के नेटवर्क और कानून के नजरिए से बात करें तो पुलिस की जांच भी सवालों के घेरे में आ जाती है। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रखी गई एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में हरियाणा में एन.डी.पी.एस. के अंतर्गत 2677, 2018 में 2587, 2017 में 2200 केस दर्ज हुए। 2015 में कुल 1661 केस दर्ज करते हुए 2241 लोगों को गिरफ्तार किया गया, इनमें से 704 को सजा हुई। इसी तरह से 2016 में 2032 केस दर्ज किए गए और 2678 लोगों को तस्करी के आरोप में पकड़ा गया। इनमें से 610 को अदालत ने सजा सुनाई। यानी पुलिस की ओर से जांच को भी अंजाम तक पहुंचाया नहीं जाता है।
हरियाणा व पंजाब में नशे से हुई मौतें
वर्ष मौतें (हरियाणा) पंजाब
2009 46 59
2010 51 59
2011 85 110
2012 72 91
2013 100 66
2014 86 38
2015 54 49
2016 86 48
2017 139 53
2018 137 55
2019 87 102
2020 57 72
2021 89 78
2022 73
कुल 1089 974