प्रदेश के 58 सालों में एक महिला 17 पुरुषों को मिली विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी!
*सर्वाधिक 3 बार हरमोहिंद्र सिंह चा बने विधानसभा के अध्यक्ष तो सबसे कम 6 दिन तक अध्यक्ष रहे राव बीरेंद्र सिंह *15वीं विधानसभा के अध्यक्ष हैं हरविंद्र कल्याण प्रस्तुति: संजय अरोड़ा पिछले 58 सालों से अपने ‘वजूद’ की जमीन पर खड़े हरित प्रदेश हरियाणा के सियासी रंग भी कई मिसालों के तौर पर देश भर में अपनी पहचान कायम किए हुए हैं। हरियाणा ने पंजाब से अलग हटकर अलग प्रदेश के रूप में जहां विकास की दृष्टि से नए डग भरे तो इसी प्रदेश के राजनीतिक ‘अतीत’ ने भी देश के सियासी मानचित्र पर खुद को नए रूप में उकेरा।
पिछले 58 सालों में राजनीतिक लिहाज से हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष की बात की जाए तो इस ओहदे ने भी राजनीतिक इतिहास के पन्नों पर नए अध्याय लिखे हैं। ये अध्याय इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि इन 58 सालों में हरियाणा के 18 ऐसे नेता हैं जिन्हें विधानसभा में अध्यक्ष की ‘कुर्सी’ पर बैठने का सौभाग्य हासिल हुआ। इसके अलावा अब तक ये भी एक इतिहास ही है कि हरियाणा गठन के बाद जगाधरी से विधायक निर्वाचित हुईं शन्नो देवी एक मात्र ऐसी महिला नेत्री थीं जो पहली बार विधानसभा की अध्यक्ष बनी और उसके बाद से लेकर आज तक किसी अन्य महिला नेत्री को पुन: इस कुर्सी पर बैठने का सौभाग्य नहीं मिला। शन्नो देवी उस दौर में विधानसभा की अध्यक्ष बनी जब संयुक्त पंजाब से अलग हटकर हरियाणा अलग राज्य रूप में अस्तित्व में आया था।
ऐसे में 6 दिसम्बर 1966 को शन्नो देवी विधानसभा में स्पीकर चुनी गईं। उन्होंने 17 मार्च 1967 तक 101 दिन इस जिम्मेदारी को संभाले रखा। इनके अलावा 2 नेता ऐसे भी हैं स्पीकर के साथ साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री भी बने। इनमें राव बीरेंद्र सिंह व बनारसी दास गुप्ता का ही नाम शामिल हैं। वर्तमान में हरियाणा की 15वीं विधानसभा में हरविंद्र कल्याण बतौर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। शन्नोदेवी के बाद कोई भी महिला नहीं बनी अध्यक्ष गौरतलब है कि साल 1966 से पहले हरियाणा संयुक्त पंजाब का ही हिस्सा था और राजनीतिक लिहाज से भी सारी गतिविधियां संयुक्त पंजाब से ही जुड़ी हुई थीं। मगर 1 नवम्बर 1966 को हरियाणा संयुक्त पंजाब से एक अलग राज्य के रूप में उभरा और राजनीतिक व्यवस्थाएं भी संयुक्त पंजाब से अलग हो गईं।
हरियाणा गठन के बाद जब पहली बार अलग विधानसभा का गठन हुआ तो जगाधरी से विधायक निर्वाचित हुईं शन्नोदेवी को विधानसभा में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई। शन्नोदेवी ने 6 दिसम्बर 1966 से लेकर 17 मार्च 1967 तक बतौर विधानसभा अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। 101 दिन तक इस ओहदे पर रहने वाली शन्नोदेवी हरियाणा के अब तक के राजनीतिक इतिहास में इसलिए भी याद रखी जाती हैं क्योंकि अब तक के 58 सालों में वे केवल मात्र इकलौती महिला नेत्री रही हैं जिन्होंने विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभाला। इनके बाद फिर किसी महिला नेत्री को ऐसा अवसर नहीं मिला। ऐसे में साफ तौर पर कहा जा सकता है कि हरियाणा के राजनीतिक पन्नों में जब जब विधानसभा में रहे अध्यक्षों का जिक्र होगा तो बतौर महिला नेत्री शन्नो देवी का नाम सबसे ऊपर होगा। ये दो नेता स्पीकर के बाद बने मुख्यमंत्री अहम पहलू ये भी है कि हरियाणा के इन 58 सालों के अब तक के राजनीतिक सफर के दौरान जहां 18 नेताओं को विधानसभा अध्यक्ष बनने का मौका मिला तो वहीं 2 नेता ऐसे भी थे जो मुख्यमंत्री भी बने थे। इनमें राव बीरेंद्र सिंह व बनारसी दास गुप्ता का नाम शामिल है। राव बीरेंद्र सिंह पटौदी से विधायक निर्वाचित हुए और उन्हें 17 मार्च 1967 को विधानसभा में अध्यक्ष चुना गया। हालांकि उनका
कार्यकाल केवल मात्र 6 दिन ही रहा और इसके बाद उन्हें 24 मार्च 1967 को प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया। इसके अलावा बनारसी दास गुप्ता दूसरे ऐसे नेता रहे जो 3 अप्रैल 1972 को विधानसभा अध्यक्ष बने और वे 1 वर्ष 226 दिन तक इस पद पर रहे और बाद में 1 दिसम्बर 1975 को हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। इसके अलावा अब तक बने विधानसभा अध्यक्षों में से हरमोहिंद्र सिंह चा व रणसिंह अहलावत भी ऐसे नेता रहे जिन्हें 1 से अधिक बार विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के अवसर मिला। हरमोहिंद्र सिंह चा 3 बार जबकि रणसिंह अहलावत 2 बार विधानसभा के अध्यक्ष बने। इसी प्रकार 2 ऐसे नेता भी रहे जिन्होंने सबसे ज्यादा समय तक अपना
कार्यकाल पूरा किया। सरदार तारा सिंह ने 5 साल 15 दिन व सतबीर कादियान ने 5 साल 12 दिन तक बतौर विधानसभा अध्यक्ष के रूप में काम किया। एक बार के कार्यकाल की बात करें तो विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल सरदार तारा सिंह का रहा जबकि सबसे कम राव बीरेंद्र सिंह का केवल 6 दिन का कार्यकाल रहा। यदि कुल कार्यकाल अवधि की बात करें तो तीन बार स्पीकर रहे हरमोहिंद्र सिंह चा कुल मिलाकर 6 साल 24 दिन तक इस पद पर रहे।
58 सालों में इन नेताओं ने संभाला स्पीकर का पद
हरियाणा के राजनीति इतिहास के अनुसार विधानसभा में बतौर स्पीकर 18 नेताओं को मौका मिला। इनमें सबसे पहले शन्नोदेवी अध्यक्ष बनी तो उनके बाद राव बीरेंद्र सिंह, श्रीचंद, रणसिंह अहलावत, बनारसी दास गुप्ता, सरूप सिंह, कर्नल राम सिंह, सरदार तारा सिंह, हरमोहिंद्र सिंह चा, ईश्वर सिंह, छतर सिंह चौहान, अशोक अरोड़ा, सतबीर कादियान, रघुबीर सिंह कादियान, कुलदीप शर्मा, कंवरपाल गुर्जर व ज्ञानचंद गुप्ता शामिल हैं जबकि वर्तमान में 15वीं विधानसभा में घरौंडा से विधायक निर्वाचित हुए हरविंद्र कल्याण बतौर स्पीकर पदभार संभाले हुए हैं। उन्हें ये जिम्मेदारी 25 अक्तूबर 2024 को मिली थी। इनमें शन्नो देवी 101 दिन, राव बीरेंद्र सिंह 6 दिन, श्रीचंद 111 दिन, रणसिंह 3 साल 263 दिन, बनारसी दास गुप्ता 1 साल 226 दिन, सरुप सिंह 3 साल 230 दिन, रणसिंह 308 दिन, कर्नल राम सिंह 4 साल 40 दिन, सरदार तारा सिंह 5 साल 15 दिन, हरमोहिंद्र सिंह चा 4 साल, ईश्वर सिंह 4 साल 318 दिन, छतर सिंह चौहान 3 साल 66 दिन, अशोक अरोड़ा 217 दिन, सतबीर कादियान 5 साल 12 दिन, हरमोहिंद्र सिंह च_ा 297 दिन, रघुबीर सिंह कादियान 3 साल 287 दिन, हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा 1 साल 92 दिन, कुलदीप शर्मा 3 साल 243 दिन, कंवरपाल गुर्जर 4 साल 364 दिन, ज्ञानचंद गुप्ता 4 साल 356 दिन तक इस पद पर रहे। अब वर्तमान में 25 अक्तूबर से हरविंद्र कल्याण इस पद पर हैं।